रण संगिणी: मौन मोर्चे की योद्धा Rann Sangini (HINDI)
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क्या कभी किसी ने उस युद्ध को देखा है जो मोर्चे पर नहीं, बल्कि एक सूनी चौखट पर निरंतर, बिना किसी विराम के लड़ा जाता है? 'रण-संगिनी' उन्ही 'मौन योद्धाओं' की आवाज़ है जिनके त्याग से देश चैन की नींद सोता है। मृदुला पाठक की लेखनी से उपजी यह पंक्तियाँ एक सैनिक की पत्नी के धैर्य, उसके साहस के शृंगार और उसके अटूट स्वाभिमान का जीवंत दस्तावेज़ है।
विवाह की पहली अल्हड़ खुशी से लेकर, विरह की लंबी अकेली रातों और सेवानिवृत्ति के गौरवशाली संन्यास तक, यह पुस्तक एक सैनिक की अर्धांगिनी के रूपांतरण की अमर गाथा है।
एक सिपाही की पत्नी होना महज़ एक रिश्ता नहीं, उसके लिए वह एक मोक्ष है, एक निर्वाण है। "जो रक्षक की भी रक्षिका है " रणसंगिणी उसकी अभिव्यक्ति है।
**********************************
प्रबल भावनाओं का सहज प्रवाह है रणसंगिणी
. — ड़ॉ आर एम् पाठक, विभागाध्यक्ष स च महाविधालय, एवं अध्यक्ष हिंदी प्रचारिणी सभा
मौन साहसिक क्षणों को महसूस करने पर विवश करता है रणसंगिणी का हर एक शब्द |
. — योगाचार्य अभिषेक शर्मा
भाषा का सरल प्रयोग, शब्दों का सटीक चयन और भावनाओं का सहज प्रवाह इस सुंदर कविता संग्रह रणसंगिणी को अत्यंत प्रभावशाली बनाता है।
— प्रीति शर्मा
“रणसंगिनी” एक ऐसा अनूठा प्रयास है, जिस में मृदुला ने सेना की चुनौतियों में एक अर्धांगनी की भूमिका को काव्य में अद्भुत ढंग से पिरोया है।सीमा पर पहरा देते हुए हर सैनिक के पीछे जो एक आधार शिला विद्यमान है, उसके स्नेह और विश्वास से सराबोर है यह कृति।
. — ब्रिगेडियर सुयश शर्मा
विवाह की पहली अल्हड़ खुशी से लेकर, विरह की लंबी अकेली रातों और सेवानिवृत्ति के गौरवशाली संन्यास तक, यह पुस्तक एक सैनिक की अर्धांगिनी के रूपांतरण की अमर गाथा है।
एक सिपाही की पत्नी होना महज़ एक रिश्ता नहीं, उसके लिए वह एक मोक्ष है, एक निर्वाण है। "जो रक्षक की भी रक्षिका है " रणसंगिणी उसकी अभिव्यक्ति है।
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प्रबल भावनाओं का सहज प्रवाह है रणसंगिणी
. — ड़ॉ आर एम् पाठक, विभागाध्यक्ष स च महाविधालय, एवं अध्यक्ष हिंदी प्रचारिणी सभा
मौन साहसिक क्षणों को महसूस करने पर विवश करता है रणसंगिणी का हर एक शब्द |
. — योगाचार्य अभिषेक शर्मा
भाषा का सरल प्रयोग, शब्दों का सटीक चयन और भावनाओं का सहज प्रवाह इस सुंदर कविता संग्रह रणसंगिणी को अत्यंत प्रभावशाली बनाता है।
— प्रीति शर्मा
“रणसंगिनी” एक ऐसा अनूठा प्रयास है, जिस में मृदुला ने सेना की चुनौतियों में एक अर्धांगनी की भूमिका को काव्य में अद्भुत ढंग से पिरोया है।सीमा पर पहरा देते हुए हर सैनिक के पीछे जो एक आधार शिला विद्यमान है, उसके स्नेह और विश्वास से सराबोर है यह कृति।
. — ब्रिगेडियर सुयश शर्मा
