Zindgi: Safar, Sangharsh aur Sach
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यह कविता-संग्रह जीवन को किसी ऊँचे मंच से नहीं देखता, बल्कि उसी आँगन में बैठकर सुनता है जहाँ सुख और दुख साथ-साथ पलते हैं।
“ज़िन्दगी : सफ़र, संघर्ष और सच” एक ऐसे मन की आवाज़ है जो रिश्तों की उलझनों, समाज की विडंबनाओं, समय की मार और भीतर के सवालों से गुज़रते हुए अंततः स्वीकार और करुणा तक पहुँचता है।
यहाँ चिड़िया की उड़ान है, रोटी की गर्माहट है, बुझते दीये की तसल्ली है, और उस सुखद अहसास की शांति भी जो सब कुछ सह लेने के बाद प्रकृति की गोद में मिलती है।
ये कविताएँ न उपदेश देती हैं, न निष्कर्ष थोपती हैं। ये बस हाथ थामकर कहती हैं— देखो, यही ज़िन्दगी है। जैसी है, वैसी ही क़ीमती है।
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शशि भूषण सिंह का जन्म बिहार के सिवान ज़िले के एक ग्रामीण परिवेश में हुआ। पिता की स्थानांतरणीय सेवा के कारण उनका बचपन बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में बीता, जिससे उन्हें अनेक संस्कृतियों और जीवनानुभवों को निकट से देखने का अवसर मिला।
वे बी.आई.टी. सिंदरी से विद्युत अभियंत्रण में स्नातक हैं और 1972 से 2011 तक सेल, बोकारो स्टील प्लांट में सेवारत रहे। सेवा काल के साथ-साथ उन्होंने औद्योगिक अभियंत्रण, होम्योपैथी, जैव-रसायन तथा योग शिक्षा में भी अध्ययन किया।
यद्यपि पेशे से वे अभियंता रहे, पर भीतर से वे अत्यंत भावुक और संवेदनशील रहे। जीवन की हलचल जब भी मन को छूती, कविता बनकर शब्दों में ढल जाती। यह काव्य-संग्रह उन्हीं अनुभूतियों का सजीव संकलन है।
